शिखर नेताओं ने संभाली कमान

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राजस्थान कांग्रेस में परोक्ष रूप से गुटबाजी की गूंज सुनाई दे रही है। भाजपा के पास वसुंधरा के रूप में स्पष्ट नेतृत्व है। यह चुनाव कांग्रेस के लिए वजूद का सवाल लेकर खड़ा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान विधानसभा चुनाव में पार्टी की सत्ता में वापसी के लिए युवाओं और अनुभवी नेताओं को बराबर तवज्जो देते हुए एक टीम को चुनावी कमान सौंपी है। चुनावी तैयारियों में जुटे इन नेताओं ने भाजपा को टक्कर देने की कसरतें तेज कर दी है।

आजादी के बाद राजस्थान का यह पहला विधानसभा चुनाव है जिसमें भाजपा और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने सीधे तौर पर चुनाव की कमान संभाली है। प्रदेश में हर मोर्चे पर अमित शाह और राहुल गांधी आमनेसा मने दिख रहे हैं। बीच-बीच में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मोर्चा संभाल रहे हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है जब राज्य विधानसभा में सिर्फ राजनीतिक दलों की ही नहीं, पार्टी के दिग्गजों की साख भी दांव पर है। उनकी सियासी हनक चुनावी नतीजे तय करेगी। वसुंधरा राजे के लिए तो 2013 का करिश्मा दोहराकर खुद को साबित करने की जबरदस्त चुनौती है। राजे की टीम में अशोक परनामी, यूनुस खान और गजेन्द्र सिंह खींवसर सरीखे नेताओं ने चुनावी बिसात बिछाने और अपने खेमें के लोगों को टिकट दिलाने की कवायद को तेज कर दिया है। कांग्रेस में जहां नेतृत्व को लेकर असमंजस है तो अप्रत्यक्ष रूप से गुटबाजी की गूंज भी सुनाई दे रही है, वहीं भाजपा के पास वसुंधरा के रूप में स्पष्ट नेतृत्व है। यह चुनाव कांग्रेस के लिए वजूद का सवाल लेकर खड़ा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान विधानसभा चुनाव में पार्टी की सत्ता में वापसी के लिए युवाओं और अनुभवी नेताओं को बराबर तवज्जो देते हुए ‘नवरत्नों’ को चुनावी कमान सौंपी है। चुनावी तैयारियों में जुटे इन नेताओं ने भाजपा को टक्कर देने की कसरतें तेज कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,‘राज्य में चुनाव अभियान की धुरी गुजरात चुनाव के बाद लगातार ताकतवर हो रहे संगठन महासचिव अशोक गहलोत बनेंगे। आलाकमान की इस कवायद ने उन अटकलों को खारिज कर दिया है कि गहलोत को राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का पूर्ण प्रभारी बनाकर राजस्थान की राजनीति से दूर कर दिया है-लिहाजा चुनावी जीत की स्थिति में ताजपोशी के केन्द्र गहलोत ही होंगे। गहलोत की टीम में शामिल कद्दावर नेता शांति धारीवाल, रघुवीर मीणा और महेश जोशी समेत अन्य नेताओं ने चुनावी तैयारी को लेकर बिसात बिछा दी है । उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने अपनी टीम के कद्दावर नेताओं सी.पी. जोशी, प्रमोद भाया और भंवरलाल मेघवाल के साथ चुनावी रणनीति गढ़ने में ताकत झोंक दी है । चुनाव आयोग की ओर से तारीखों के ऐलान ने राजस्थान में राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है। राजस्थान में एक ही पारी में 7 दिसम्बर को मतदान होगा और चुनावी नतीजे चार राज्यों साथ 11 दिसम्बर को घोषित किए जाएंगे। राजनीति के जानकारों का कहना है कि राजस्थान समेत पांच राज्यों के चुनावी नतीजे 2019 में होने वाले आम चुनाव का रुझान दर्शाएंगे। सियासी महासंग्राम चेहरों और नामों की बजाय संगठन के बूते जीतने की तैयारी चल रही है । भाजपा सत्ता परिवर्तन के मिथक को तोड़ना चाह रही है। जबकि कांग्रेस का मानना है कि यह मिथक ही उसके लिए लोकसभा चुनाव में संजीवनी बनेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो बार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक पखवाड़े में पांच बार आ चुके हैं जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार आ ही रहे हैं।

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