कांग्रेस: सत्ता ही बनी चुनौती

0
23

एक के बाद एक पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस के लिए मिजोरम की सत्ता को बचा लेना बड़ी चुनौती बन गई है। एक ओर 10 वर्षों के शासनकाल के प्रति जनरोष का खतरा है, तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है। मिजो नेशानल फ्रंट भी मुकाबले को तैयार है।

महज 11 लाख की आबादी वाला 21087 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले मिजोरम का 91 फीसद भूभाग जंगल से घिरा हुआ है। यह देश का ऐसा राज्य है जिसकी सीमा पूर्वोत्तर के त्रिपुरा, असम तथा मणिपुर से मिलने के साथ ही इसके 722 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश और म्यांमार से मिलती हैं। वर्ष 2013 में हुए मिजोरम विधानसभा चुनाव के दौरान मिजोरम की कुल 40 सीटों में से 34 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव जीते। जोरमथांगा की पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) को पांच सीटें तथा मिजोरम पीपुल्स कॉन्फ्रेंस को एक सीट मिली थी। कांग्रेस नेता ललथनहवला यहां के मुख्यमंत्री हैं। हवला पांच बार मिजोरम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस बीच दो बार एमएनएफ के नेता जोरामथांगा मुख्यमंत्री रहे। 2013 में मिजोरम में कांग्रेस को कुल 44.6 फीसद वोट मिला था। इसका मुख्य कारण यह बताया गया कि चुनाव के दौरान मेडा के सभी घटक दल गठबंधन के बावजूद एक-दूसरे दल के विरुद्ध उम्मीदवार चुनाव में खड़े किए थे। वहीं एमएनएफ के नेता जोरामथांगा के 10 वर्षों के शासन काल में हुए कथित भ्रष्टाचार व गुंडागर्दी से राज्य की जनता ऊब चुकी थी। स्वयं मुख्यमंत्री जोरामथांगा लगातार दो बार चुनाव हार गए थे। अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, असम, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय में जीत का परचम लहने को लेकर उत्साहित भाजपा मिजोरम में भी इसी प्रकार के परिणामों की उम्मीद रखती है।

इस संदर्भ में यथावत के साथ हुई विशेष बातचीत में भाजपा के पूर्वोत्तर राज्यों के प्रभारी अजय जामवाल ने कहा कि चुनाव के बाद मिजोरम भी कांग्रेस मुक्त हो जाएगा। मिजोरम में गैर कांग्रेसी सरकार बनेगी। उसमें भाजपा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रति मिजोरम के लोगों का काफी अधिक रुझान है। खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर यहां के युवकों में अत्यधिक उत्साह देखा जा रहा है। इससे जाहिर है कि चुनाव में भाजपा की अच्छी स्थिति बन सकेगी। जामवाल ने कहा कि मिजोरम में नए वर्ष का आगाज परिवर्तन से होगा। वहीं मिजोरम चुनाव के संदर्भ में पूछे जाने पर आॅल इंडिया कांग्रेस कमेटी के मिजोरम प्रभारी सचिव भूपेन कुमार बोरा ने यथावत को बताया कि इस चुनाव में 30 से अधिक सीटें कांग्रेस किसी भी हालत में जीतेगी ही। संभव है कि भाजपा और इसका गठबंधन दो सीटों पर ही सिमट कर रह जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा यहां जीतने के लिए नहीं बल्कि गुमराह करने के लिए चुनाव लड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चकमा आॅटोनॉमस काउंसिल के चुनाव में 20 में से 5 सीटें भाजपा ने जीती थं। लेकिन छद्म तरीके से पूरे काउंसिल पर पार्टी ने कब्जा कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एमएनएफ के साथ अंदर ही अंदर तालमेल करके मेघालय, नगालैंड आदि राज्यों की तरह यहां भी छद्म तरीके से सत्ता पर काबिज होने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के बीच कोई एकता नहीं है। सभी अलग-अलग ताल में अलग-अलग सुर अलाप रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के खिलाफ कोई भी संस्थान विरोधी लहर कार्य नहीं कर रही है। सरकार ने घोषणा पत्र में किए गए वादे पूरी तरह से पूरे किए। दो चिरलंबित योजनाओं, ट्वीरिल की 60 मेगावाट की हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट तथा ‘माइनर’ इंस्टीट्यूट को पूरा कर लिया। वहीं लाई, चकमा, मारा आदि जनजातियों की मांगें भी सरकार ने पूरी कर दी है।

राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस तथा केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा दोनों ही के अपने-अपने दावे, अपनी-अपनी राणनीतियां अपनी जगह हैं। जहां, गैर कांग्रेसी दल राज्य में मुख्यमंत्री के 79 वर्ष का बुजुर्ग होने, शराबबंदी के बाद फिर शराब चालू होने, बेरोजगारी की समस्या आदि को मुद्दा बना रही हैं। वहीं, कांग्रेस पार्टी केंद्र के मोदी सरकार के समय में हुई मूल्य वृद्धि को मुख्य मुद्दा बना रही है। दोनों ही दल एक-दूसरे पर छद्म राजनीति करने का आरोप लगा रही हैं। जहां भाजपा और इसकी समर्थित पार्टियां कांग्रेस पर ईसाइयत की राजनीति करने का आरोप लगा रही हैं, वहीं कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा छद्म तरीके से सत्ता को हथिया कर अपना एजेंडा लागू करना चाहती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here